उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि डीएम फोन रिसीव नहीं करते, उनके अर्दली कॉल उठाकर बहस करने लगते हैं। एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर बार ‘मैडम बिजी हैं’ कहकर टाल दिया गया। जासमीर अंसारी ने दावा किया कि अधिकारियों के रवैये से नाराज होकर सत्तापक्ष के विधायकों और एक मंत्री को भी धरना देना पड़ा।
सुरेंद्र चौधरी ने बिजली विभाग के एमडी से बात न हो पाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पीआरओ ने खुद को एमडी बताकर बात की। इस पर सदन में हंगामा हुआ। इसी दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री थे और पूर्व ही रहेंगे। इस पर सपा सदस्यों ने विरोध जताते हुए कहा कि 15 मार्च 2027 को अखिलेश यादव बतौर मुख्यमंत्री सदन में होंगे।
भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के सवाल पर मंत्री की अनुपस्थिति भी चर्चा में रही। सभापति ने उच्च शिक्षामंत्री योगेंद्र उपाध्याय का नाम दो बार पुकारा। मंत्री के देर से पहुंचने पर सभापति ने नाराजगी जाहिर की और समय की पाबंदी का संदेश दिया। सदन में पूरे दिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।